जमशेदपुर: स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में टाटा स्टील ने एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने जमशेदपुर में Tata Education Excellence Programme (TEEP) 2.0 की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम स्कूलों में बेहतर शिक्षण व्यवस्था, नेतृत्व क्षमता और छात्र-केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।TEEP 2.0 का औपचारिक शुभारंभ जमशेदपुर के यूनाइटेड क्लब (The United Club) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया। इस मौके पर टाटा स्टील के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षा जगत से जुड़े प्रतिनिधि और विभिन्न स्कूलों के प्रमुख मौजूद रहे।
क्या है TEEP 2.0?
TEEP 2.0 टाटा स्टील के शिक्षा सुधार कार्यक्रम का अपग्रेडेड संस्करण है। इसका मुख्य लक्ष्य स्कूलों में पढ़ाई के स्तर को बेहतर बनाना, शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर फोकस करना है।
इस कार्यक्रम के तहत:
- शिक्षकों की ट्रेनिंग और क्षमता विकास
- स्कूल मैनेजमेंट और नेतृत्व कौशल में सुधार
- छात्रों के सीखने के परिणाम (Learning Outcomes) को बेहतर बनाना
- समग्र और मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ावा जैसे विषयों पर काम किया जाएगा।
30 स्कूलों में लागू होगा कार्यक्रम
जानकारी के अनुसार, TEEP 2.0 को जमशेदपुर और आसपास के लगभग 30 पार्टनर स्कूलों में लागू किया जाएगा। इस पहल को स्कूलों के साथ मिलकर तैयार किया गया है, ताकि बदलते समय की जरूरतों के अनुसार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
टाटा स्टील के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में टाटा स्टील के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से:
- डी.बी. सुंदरा रामम (Vice President – Corporate Services)
- पीयूष गुप्ता (Vice President – TQM, GSP & Supply Chain)
- अतुल भटनागर (Managing Director – TSUISL)
- त्रिप्ति श्रीवास्तव (Chief – TQM & CQA)
- सौरव रॉय (Chief – CSR) सहित टाटा स्टील फाउंडेशन और TEEP टीम के प्रतिनिधि शामिल रहे।
2003 से शिक्षा सुधार में सक्रिय है TEEP
टाटा स्टील का TEEP कार्यक्रम वर्ष 2003 से स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए चलाया जा रहा है। यह एक संरचित और मूल्यांकन आधारित कार्यक्रम है, जिसमें स्कूलों के साथ सालभर तक कार्य कर उन्हें बेहतर शिक्षा मॉडल अपनाने में मदद दी जाती है।
शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम
TEEP 2.0 की शुरुआत को जमशेदपुर में शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे आने वाले समय में स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता, प्रशासनिक व्यवस्था और छात्रों के समग्र विकास में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।





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