डिस्कवरी भारत ब्यूरो, जमशेदपुर: 700 करोड़ रुपये से अधिक के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) फर्जीवाड़े के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमशेदपुर और कोलकाता में एक साथ छापेमारी की है। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान वित्तीय अपराध में शामिल दो मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। डिस्कवरी भारत को प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फर्जी शेल कंपनियों और जाली दस्तावेजों के माध्यम से सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले सिंडिकेट के खिलाफ यह शिकंजा कसा गया है।
मामले की पृष्ठभूमि और फर्जीवाड़े का खेल
स्थानीय पुलिस और केंद्रीय अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस नेटवर्क ने दर्जनों फर्जी फर्में बनाकर अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा किया था। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बिना किसी वास्तविक सामान या सेवाओं की आपूर्ति किए बिना ही करोड़ों रुपये के फर्जी इनवॉइस जारी किए जा रहे थे। डिस्कवरी भारत की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यह फर्जीवाड़ा केवल झारखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि कोलकाता के कई व्यापारिक ठिकानों से भी इसके तार सीधे जुड़े हुए थे।
छापेमारी के प्रमुख बिंदु
- जमशेदपुर और कोलकाता स्थित संदिग्ध परिसरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और आवासीय ठिकानों पर ईडी की कई टीमों ने एक साथ दबिश दी।
- कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, लैपटॉप, मोबाइल और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
- नेटवर्क के दो मास्टरमाइंड्स को गिरफ्तार किया गया है, जिन्हें अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी है।
- फर्जी कंपनियों के नाम पर संचालित दर्जनों बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आगे की कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक रुख
प्रवर्तन निदेशालय की टीम अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर इस गिरोह के अन्य सहयोगियों और वित्तीय लाभ प्राप्त करने वाले बड़े कारोबारियों का पता लगा रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के बाद कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है। प्रशासन ने साफ किया है कि कर चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।



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