डिस्कवरी भारत ब्यूरो, जमशेदपुर: झारखंड के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार जमशेदपुर स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का संकट और गहरा गया है। स्वास्थ्य विभाग की रेजिडेंसी योजना के तहत जूनियर रेजिडेंट (गैर-शैक्षणिक) डॉक्टरों की बहाली के लिए चलाए गए हालिया अभियान में बेहद निराशाजनक प्रतिक्रिया मिली है। अस्पताल प्रशासन द्वारा 54 रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन साक्षात्कार के बाद महज 8 डॉक्टरों का ही चयन हो सका है। इसके चलते 46 पद अब भी खाली रह गए हैं, जिससे मरीजों के इलाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
बहाली प्रक्रिया और आवेदनों का आंकड़ा
स्वास्थ्य विभाग के दिशानिर्देशों के तहत आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में कुल 12 अभ्यर्थियों ने ही आवेदन प्रस्तुत किया था। बुधवार को आयोजित साक्षात्कार के दौरान दस्तावेजों की जांच में चार अभ्यर्थियों को अयोग्य पाया गया, जिसके बाद केवल आठ चिकित्सकों को एक वर्ष के अनुबंध पर नियुक्त किया गया। डिस्कवरी भारत को प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चयन प्रक्रिया में एमजीएम मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले चिकित्सकों को प्राथमिकता दी गई थी ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को संस्थान में सेवा के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
संवेदनशील विभागों में तैनाती और जमीनी असर
चयनित आठ जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को अस्पताल के सबसे व्यस्त और दबाव वाले विभागों में तैनात किया गया है:
- बर्न यूनिट: गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के बेहतर इलाज के लिए चार डॉक्टरों को बर्न यूनिट में पदस्थापित किया गया है।
- मेडिसिन आईसीयू (Medicine ICU): शेष चार डॉक्टरों को क्रिटिकल केयर और आईसीयू विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ज्ञात हो कि ये दोनों ही विभाग अत्यधिक मरीज भार और मैनपावर की कमी के कारण लंबे समय से भारी दबाव में काम कर रहे हैं। आठ नए डॉक्टरों के आने से तात्कालिक राहत तो मिलेगी, लेकिन 46 रिक्त पदों के न भरे जाने से स्थिति में कोई बड़ा सुधार होना कठिन नजर आ रहा है।
युवा डॉक्टरों की अरुचि और NMC मानकों की चिंता
डिस्कवरी भारत की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि सरकारी मेडिकल संस्थानों में युवा डॉक्टरों की घटती रुचि स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुकी है। 54 पदों के लिए केवल 12 आवेदन आना यह दर्शाता है कि मेडिकल स्नातक संविदा आधारित सरकारी सेवाओं के प्रति आकर्षित नहीं हो रहे हैं। एमजीएम अस्पताल लंबे समय से डॉक्टरों और फैकल्टी सदस्यों की कमी झेल रहा है। इसका सीधा असर न केवल मरीजों की देखभाल और मौजूदा मेडिकल स्टाफ के कार्यभार पर पड़ रहा है, बल्कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के निरीक्षण में भी संस्थान के लिए चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। एनएमसी के मानकों के अनुसार पर्याप्त फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य है।
आगे की राह और प्रशासनिक कदम
अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि रिक्त रह गए पदों को भरने के लिए जल्द ही पुन: विज्ञापन जारी किया जा सकता है। इसके साथ ही, युवा चिकित्सकों को आकर्षित करने के लिए कार्य स्थितियों और प्रोत्साहन नीतियों की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि कोल्हान प्रमंडल के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आने वाले जरूरतमंद मरीजों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।



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