डिस्कवरी भारत ब्यूरो, झारखंड: झारखंड के गैर-टीईटी उत्तीर्ण सहायक अध्यापकों (पारा शिक्षकों) के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं। राज्य के लगभग 25 हजार शिक्षकों की सेवा पर बने संकट को लेकर शिक्षक संगठन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुके हैं। अनिवार्य टीईटी परीक्षा की शर्तों और विभागीय नीतियों के खिलाफ शिक्षकों ने आगामी 22 अक्टूबर से उग्र आंदोलन और आमरण अनशन की घोषणा कर दी है।
मामले की पृष्ठभूमि और शिक्षकों का असंतोष
शिक्षकों का कहना है कि वे बीते कई वर्षों से दूरदराज के क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डिस्कवरी भारत की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि राज्य सरकार द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को सेवा में बनाए रखने या समायोजन के लिए अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे वर्षों से कार्यरत हजारों पारा शिक्षक बाहर होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। शिक्षकों का तर्क है कि अनुभव और पूर्व में ली गई परीक्षाओं के आधार पर उन्हें राहत दी जानी चाहिए।
शिक्षक संघ की प्रमुख मांगें और रणनीति
शिक्षक संघों ने राज्यव्यापी बैठक कर सरकार के रवैये पर भारी नाराजगी जताई है। संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि वार्ता के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है, जिसके कारण शिक्षकों के समक्ष आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचा है।
- 22 अक्टूबर से अनशन: राजधानी रांची में हजारों शिक्षक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
- प्रभावित वर्ग: राज्य भर के लगभग 25,000 गैर-टीईटी पास सहायक अध्यापक।
- मुख्य मांगें: सेवा का स्थायीकरण, नियमावली में ढील, और आकलन परीक्षा के आधार पर ही मानदेय वृद्धि की सुविधा।
प्रशासनिक हलचल और आगे की राह
डिस्कवरी भारत को प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग इस मामले में विधिक पहलुओं और न्यायालय के आदेशों का अध्ययन कर रहा है। अधिकारियों का प्रयास है कि नियमावली का उल्लंघन किए बिना कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके। हालांकि, शिक्षकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 22 अक्टूबर से पहले उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं आया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।



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