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कलम की विरासत और काबिलियत का परचम: नवल सिंह की स्वर्णिम सफलता



जमशेदपुर, झारखंड। कहते हैं कि नींव जितनी मजबूत होती है, इमारत उतनी ही बुलंद खड़ी होती है। लौहनगरी जमशेदपुर के पत्रकारिता जगत में अपनी निष्पक्ष कलम के लिए पहचाने जाने वाले नानक सिंह के घर आज खुशियों की एक नई रोशनी उतरी है। उनके सुपुत्र नवल सिंह ने JEE Main 2026 की परीक्षा में 98.73 परसेंटाइल हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे शहर का मान बढ़ाया है।
एक पत्रकार की तपस्या, एक बेटे का संकल्प
नवल की इस सफलता के पीछे उनके पिता, वरिष्ठ पत्रकार नानक सिंह की सालों की मेहनत और सादगी छिपी है। एक पत्रकार का जीवन अक्सर समाज की समस्याओं को उजागर करने और दूसरों की आवाज़ बनने में बीत जाता है। नवल ने बचपन से ही अपने पिता को घंटों मेहनत करते और सच्चाई के लिए खड़े होते देखा था। वहीं से नवल को यह सीख मिली कि मंज़िल कितनी भी कठिन क्यों न हो, अनुशासन और ईमानदारी से उसे हासिल किया जा सकता है।
98.73 परसेंटाइल: प्रतिभा का प्रमाण
देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली JEE Main में इस तरह का स्कोर हासिल करना कोई साधारण बात नहीं है। नवल की इस उपलब्धि ने उन्हें देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों के दरवाज़े पर ला खड़ा किया है।
* तैयारी का तरीका: नवल ने अपनी पढ़ाई के दौरान घंटों तक एकाग्रता बनाए रखी। उन्होंने कोचिंग और सेल्फ-स्टडी के बीच एक सटीक संतुलन बनाया।
* गणित और विज्ञान में रुचि: सूत्रों और समीकरणों के बीच नवल ने अपनी एक अलग दुनिया बनाई, जहाँ वे हर मुश्किल सवाल को हल करने की चुनौती को खुशी-खुशी स्वीकार करते थे।
जमशेदपुर के पत्रकारों में गौरव का क्षण
जैसे ही नवल के स्कोर की खबर फैली, जमशेदपुर के प्रेस क्लब और पत्रकार गलियारों में बधाई देने वालों का तांता लग गया। साथी पत्रकारों का कहना है कि नानक सिंह ने हमेशा दूसरों की उपलब्धियों को अखबारों की सुर्खियां बनाया, लेकिन आज उनके बेटे की मेहनत खुद एक बड़ी खबर बन गई है। यह पल उन सभी के लिए गर्व का है जो जानते हैं कि एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चमकना क्या होता है।
अगला लक्ष्य: आकाश की बुलंदियां
नवल इस स्कोर से खुश तो हैं, लेकिन संतुष्ट नहीं। उनकी नज़रें अब JEE Advanced पर टिकी हैं। उनका लक्ष्य देश के प्रतिष्ठित IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में दाखिला लेना है। नवल का सपना है कि वे तकनीक के क्षेत्र में कुछ ऐसा करें जिससे समाज और देश का कल्याण हो सके।
एक संदेश युवाओं के लिए
नवल सिंह की यह कहानी जमशेदपुर के हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है। नवल ने साबित कर दिया कि अगर इरादे ‘लौहनगरी’ के लोहे जैसे मज़बूत हों, तो सफलता के शिखर तक पहुँचना नामुमकिन नहीं है।
> “नवल की इस ऐतिहासिक उड़ान पर उनके पिता नानक सिंह और पूरे परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं। जमशेदपुर को अपने इस होनहार बेटे पर गर्व है!”

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