रिपोर्ट : विश्वजीत पांडेय
रांची: झारखंड के लिए आज का दिन सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी जीत की खबर लेकर आया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए बताया है कि पिछले एक साल में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने नक्सल विरोधी अभियानों में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। ‘ऑपरेशन डबल बुल’ और ‘ऑपरेशन ऑक्टोपस’ जैसे कड़े कदमों ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।📊 सफलता के प्रमुख आंकड़े (2025-26)
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 महीनों की उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
- मुठभेड़ में ढेर नक्सली 32
- गिरफ्तार नक्सली 326
- आत्मसमर्पण (Surrender) 45
- बरामद हथियार (Rifles/IEDs) 150+
- नष्ट किए गए नक्सली कैंप 18
इन ऑपरेशंस ने बदली तस्वीर
झारखंड पुलिस और CRPF के संयुक्त प्रयासों से चलाए गए कुछ प्रमुख ऑपरेशंस ने नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों को तबाह कर दिया:
- ऑपरेशन डबल बुल: लोहरदगा और लातेहार के जंगलों में बड़े कैडरों का सफाया।
- बूढ़ा पहाड़ की आजादी: दशकों से नक्सलियों का गढ़ रहे ‘बूढ़ा पहाड़’ को अब पूरी तरह सुरक्षा बलों के नियंत्रण में ले लिया गया है, जहां अब विकास कार्य चल रहे हैं।
- ऑपरेशन ऑक्टोपस: चतरा और गया (बिहार सीमा) के इलाकों में नक्सलियों की रसद और नेटवर्क को ध्वस्त किया गया।
घटता प्रभाव, बढ़ता विश्वास
झारखंड के वे इलाके जिन्हें कभी ‘रेड कॉरिडोर’ कहा जाता था, वहां अब स्थिति सामान्य हो रही है। सारंडा से लेकर पारसनाथ तक पुलिस पिकेट्स की संख्या बढ़ाई गई है, जिससे नक्सलियों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है।



Matchless job done by the security forces and government.