डिस्कवरी भारत ब्यूरो, जमशेदपुर: जमशेदपुर स्थित औद्योगिक दिग्गज टाटा स्टील ने अपनी कैंटीन प्रबंधन प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित और डिजिटल बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। कंपनी परिसर के भीतर संचालित कैंटीनों में अब दोपहर और रात के भोजन के साथ-साथ सुबह के नाश्ते के लिए भी कर्मचारियों को एडवांस बुकिंग करानी अनिवार्य कर दी गई है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खाद्य सामग्री की बर्बादी को रोकना और कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण नाश्ता समय पर उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य और बदलाव
डिस्कवरी भारत को प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कंपनी प्रबंधन ने पाया कि कैंटीन में नाश्ते की अनिश्चित मांग के कारण कई बार भारी मात्रा में खाद्य सामग्री व्यर्थ हो जाती थी। इसे ध्यान में रखते हुए डिजिटल ऐप और ऑनलाइन कूपन प्रणाली के माध्यम से नाश्ते की स्लॉट बुकिंग अनिवार्य की गई है।
कैंटीन व्यवस्था की मुख्य विशेषताएं
- अग्रिम बुकिंग प्रक्रिया: कर्मचारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने नाश्ते का विकल्प चुनकर बुकिंग करनी होगी।
- डिजिटल कूपन प्रणाली: स्लॉट बुक होते ही कर्मचारी के मोबाइल पर कूपन जनरेट होगा, जिससे काउंटर पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी।
- भोजन की बर्बादी पर नियंत्रण: सटीक आंकड़ों के आधार पर नाश्ता तैयार होने से संसाधनों और समय दोनों की बचत होगी।
कर्मचारियों की प्रतिक्रिया और आगे की राह
डिस्कवरी भारत की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि टाटा स्टील के इस फैसले पर कर्मचारियों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक तरफ जहां कर्मचारी इसे कैंटीन सेवा और गुणवत्ता में सुधार के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ कर्मचारियों का मानना है कि शुरुआती दौर में अचानक शिफ्ट बदलने वालों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रबंधन का आश्वासन है कि आने वाले दिनों में फीडबैक के आधार पर प्रक्रिया को और अधिक लचीला बनाया जाएगा।


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