डिस्कवरी भारत ब्यूरो, जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर दक्षिण भारतीय संस्कृति की अलौकिक छटा देखने को मिल रही है। शहर में बसे तमिल समुदाय द्वारा पारंपरिक ‘गोलू पूजा’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें विषम संख्या वाली सीढ़ियों पर देवी-देवताओं और पौराणिक पात्रों की सुंदर मूर्तियों व गुड़ियों को बड़े ही कलात्मक ढंग से सजाया गया है।
तमिल संस्कृति और परंपरा की झलक
डिस्कवरी भारत की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि जमशेदपुर के कदमा, बिष्टुपुर और गोलमुरी समेत विभिन्न इलाकों में तमिल परिवारों ने अपने-अपने घरों और स्थानीय मंदिरों में गोलू पूजा का विशेष प्रबंध किया है। इस दौरान लकड़ी के स्टैंड की सीढ़ियों पर मिट्टी व कपड़े से बनी आकर्षक गुड़ियों को स्थापित किया गया है।
गोलू पूजा से जुड़े मुख्य आकर्षण
- विषम सीढ़ियों का नियम: गोलू सजावट के लिए हमेशा 3, 5, 7 या 9 जैसी विषम संख्या वाली सीढ़ियों का ही उपयोग किया जाता है।
- आध्यात्मिक महत्व: सबसे ऊपरी पायदान पर देवी-देवता विराजमान होते हैं, जबकि निचले पायदानों पर सामान्य जनजीवन, कृषि और व्यापार के प्रतीकों को दर्शाया जाता है।
- अतिथि सत्कार: पूजा के दौरान घरों में आने वाले श्रद्धालुओं और पड़ोसियों को हल्दी-कुमकुम, सुंदल (विशेष प्रसाद) और उपहार प्रदान किए जाते हैं।
सांस्कृतिक सौहार्द का संदेश
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, यह त्यौहार केवल तमिल समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के सभी लोग इस अनूठी परंपरा को देखने और इसमें भाग लेने पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में विजयादशमी तक यह आयोजन जारी रहेगा, जिससे पूरा शहर सांस्कृतिक सौहार्द और भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।


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