डिस्कवरी भारत ब्यूरो, जमशेदपुर: औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में आधुनिकता के इस दौर में भी पारंपरिक स्वाद का जादू बरकरार है। शहर में मिट्टी के चूल्हे पर पारंपरिक तरीके से डोसा तैयार किया जा रहा है, जिसे चखने के लिए रोजाना तड़के से ही स्वाद के शौकीनों की भारी भीड़ जुट रही है। डिस्कवरी भारत की पड़ताल में सामने आया कि लकड़ी की धीमी आंच पर पकने वाले इस डोसे का सौंधा स्वाद और कुरकुरापन लोगों को खूब भा रहा है।
पारंपरिक मिट्टी के चूल्हे का अनोखा जायका
आधुनिक इंडक्शन और गैस स्टोव के ज़माने में मिट्टी के चूल्हे पर बना खाना न केवल सेहत के लिहाज से बेहतर माना जाता है, बल्कि इसका स्वाद भी अनूठा होता है। जमशेदपुर में तैयार हो रहे इस डोसे की खासियत यह है कि इसे मिट्टी के तवे और चूल्हे की धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसमें एक खास सौंधी खुशबू समा जाती है।
क्यों खास है यह मिट्टी के चूल्हे का डोसा?
- सौंधा स्वाद: मिट्टी के चूल्हे और लकड़ी की धीमी आंच से डोसे में बेमिसाल स्वाद आता है।
- पारंपरिक विधि: डोसा बैटर और मसालों को पूरी तरह से पारंपरिक और देसी तरीके से तैयार किया जाता है।
- ताजा चटनी व सांभर: इसके साथ परोसी जाने वाली नारियल की चटनी और मसालेदार सांभर का मेल ग्राहकों का दिल जीत रहा है।
स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसा शुद्ध और पारंपरिक नाश्ता मिलना किसी सौगात से कम नहीं है। डिस्कवरी भारत से बातचीत के दौरान खान-पान के शौकीनों ने बताया कि यहां का डोसा न केवल किफ़ायती है बल्कि पाचन के दृष्टिकोण से भी हल्का और सुपाच्य है। यही कारण है कि सुबह से ही स्टॉल पर लोगों की कतारें देखने को मिलती हैं।



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