डिस्कवरी भारत ब्यूरो, जमशेदपुर: औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सरकारी दावों के विपरीत जिले के शिक्षा ढांचे में भारी अनियमितताएं और कमियां पाई गई हैं। हालिया समीक्षा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले के लगभग 60 प्रतिशत सरकारी स्कूलों के पास अपनी जमीन के मालिकाना दस्तावेज नहीं हैं, वहीं 21 प्रतिशत विद्यालयों में कंप्यूटर की सुविधा पूरी तरह नदारद है।
बुनियादी ढांचे का संकट: जमीन की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
डिस्कवरी भारत को प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में संचालित दर्जनों सरकारी विद्यालय वर्षों से किराए की इमारतों, सामुदायिक भवनों या बिना वैध भू-स्वामित्व वाली जमीनों पर चल रहे हैं। जमीन के स्थाई दस्तावेज न होने के कारण इन स्कूलों में नए क्लासरूम का निर्माण, खेल के मैदान का विकास और केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाले फंड का आवंटन अधर में लटका हुआ है।
डिजिटल शिक्षा का दावा हवा-हवाई: 21% स्कूलों से कंप्यूटर गायब
स्मार्ट क्लास और डिजिटल साक्षरता के सरकारी दावों के बीच जमशेदपुर के 21 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर लैब्स या तो पूरी तरह ठप पड़ी हैं या वहां कंप्यूटर मौजूद ही नहीं हैं। डिस्कवरी भारत की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कई जगहों पर कंप्यूटर खराब होने के बाद उन्हें बदला नहीं गया, जबकि कुछ विद्यालयों में कंप्यूटर का आवंटन ही कागजों तक सीमित रह गया। इससे हजारों गरीब बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:
- भूमि का अभाव: 60% सरकारी स्कूलों के पास अपनी जमीन के कानूनी कागजात नहीं हैं।
- तकनीकी विषमता: 21% विद्यालयों में कंप्यूटर लैब और आईटी उपकरण पूरी तरह अनुपलब्ध हैं।
- विकास कार्य बाधित: स्थाई जमीन न होने से नए भवन और शौचालय निर्माण के काम अटके पड़े हैं।
- अभिभावकों में रोष: स्थानीय नागरिकों ने शिक्षा विभाग से जल्द से जल्द व्यवस्था सुधारने की मांग की है।
भविष्य का रुख और प्रशासनिक आश्वासन
स्थानीय अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिला शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। अंचल अधिकारियों (CO) के साथ समन्वय स्थापित कर उन जमीनों का सीमांकन और म्यूटेशन का काम शुरू करने का निर्देश दिया गया है जहां स्कूल संचालित हो रहे हैं। वहीं, अनुपलब्ध कंप्यूटरों और आईटी सेट-अप की कमी को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर समीक्षा की जा रही है। डिस्कवरी भारत इस पूरे मामले की निगरानी जारी रखेगा ताकि जमशेदपुर के छात्रों को उनका हक मिल सके।



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