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झारखंड: 75% आदिवासी गांवों में अब तक नहीं पहुंचा नल का पानी

डिस्कवरी भारत ब्यूरो, झारखंड: झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी एक गंभीर समस्या बना हुआ है। राज्य के लगभग 75 प्रतिशत आदिवासी गांवों में अब तक नल से पीने का पानी (हर घर नल का जल) नहीं पहुंच सका है। केंद्र और राज्य सरकार की जल जीवन मिशन योजना के तहत करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत होने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। डिस्कवरी भारत की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में पीने के साफ पानी के लिए महिलाओं और बच्चों को रोजाना कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है।

योजनाओं के दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर

सरकारी फाइलों और प्रशासनिक दावों में भले ही पेयजल परियोजनाओं की प्रगति दिखाई जा रही हो, लेकिन धरातल पर झारखंड के बहुसंख्यक आदिवासी गांव अब भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। डिस्कवरी भारत को प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के कई सुदूर जिलों में पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा पड़ा है। वहीं, कई स्थानों पर जल मीनारें तो खड़ी कर दी गई हैं, लेकिन रखरखाव के अभाव या जल स्रोत की कमी के कारण वे सफेद हाथी साबित हो रही हैं।

ग्रामीणों के समक्ष मुख्य चुनौतियां

  • अधूरी परियोजनाएं: दर्जनों गांवों में नल के कनेक्शन तो लगा दिए गए हैं, परंतु मुख्य जल स्रोत या टंकी से जुड़ाव न होने से नल सूखे पड़े हैं।
  • दूषित पानी पीने की मजबूरी: नल से आपूर्ति न होने के कारण ग्रामीण आज भी चुआं, डाड़ी और नदियों के दूषित जल पर आश्रित हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बना रहता है।
  • भौगोलिक जटिलता: पहाड़ी और पथरीले क्षेत्रों में बोरिंग और पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार काफी धीमी गति से चल रहा है।

स्थानीय आक्रोश और प्रशासनिक रुख

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने विभागीय उदासीनता पर गहरा असंतोष जताया है। उनका कहना है कि हर बार आश्वासन तो मिलता है लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता। उधर, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, संबंधित कार्यकारी एजेंसियों को काम में तेजी लाने और ठेकेदारों की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

डिस्कवरी भारत इस मुद्दे पर प्रशासनिक कार्रवाई और धरातल पर होने वाले सुधार पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द स्वच्छ पेयजल का अधिकार मिल सके।

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