डिस्कवरी भारत ब्यूरो, जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर न केवल अपने औद्योगिक गौरव के लिए जानी जाती है, बल्कि इसका भारतीय एथलेटिक्स के स्वर्णिम इतिहास से भी गहरा नाता रहा है। 1970 के दशक में जमशेदपुर की टेल्को (Telco) टाउनशिप देश के शीर्ष एथलीटों की कर्मभूमि हुआ करती थी। 1974 के तेहरान एशियाई खेलों में भारत का परचम लहराने वाले टी. सी. योहानन, वी. एस. चौहान, बहादुर सिंह और सुरेश बाबू जैसे दिग्गजों ने इसी शहर में रहकर विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल की थीं। डिस्कवरी भारत की विशेष पड़ताल में सामने आई उस दौर की अनकही यादें और खिलाड़ियों का अद्भुत आत्मीय संबंध।
तेहरान एशियन गेम्स के नायकों का ठिकाना बनी टेल्को टाउनशिप
1974 के तेहरान एशियाई खेलों में भारत ने एथलेटिक्स स्पर्धा में चार स्वर्ण पदक जीते थे। इनमें से डेकाथलॉन स्टार वी. एस. चौहान और लॉन्ग जंप के दिग्गज टी. सी. योहानन टेल्को में ही कार्यरत थे। इनके अलावा पदक विजेता बहादुर सिंह, जगराज सिंह और सुरेश बाबू भी टेल्को परिवार का हिस्सा थे। इस तरह तत्कालीन टेल्को टाउनशिप भारतीय खेल जगत् के लिए एक मिनी इंडिया और प्रतिभाओं का गढ़ बन गई थी।
सीमित संसाधन, मगर आसमान छूता जज्बा
उस दौर में आज की तरह आधुनिक जिम या इंडोर फिटनेस सेंटर उपलब्ध नहीं थे, लेकिन खिलाड़ियों का समर्पण अद्वितीय था। डिस्कवरी भारत की पड़ताल में उस दौर के प्रशिक्षण से जुड़ी कई दिलचस्प बातें सामने आई हैं:
- देसी इनोवेशन से प्रैक्टिस: स्टार एथलीट सुरेश बाबू ने जंपिंग और कैटापुल्टिंग अभ्यास के लिए अपने कमरे के छत वाले पंखे को हटाकर उसके कुंडे से रस्सी बांध रखी थी।
- 30 साल तक अटूट रहा रिकॉर्ड: लॉन्ग जंपर टी. सी. योहानन ने तेहरान में 8.07 मीटर की छलांग लगाकर नया एशियाई रिकॉर्ड स्थापित किया था, जो अगले तीन दशकों तक अटूट रहा।
- अद्भुत सौहार्द और ‘चाय का अड्डा’: एथलेटिक्स ट्रैक के पास स्थित वरिष्ठ एथलीट वसीम नकवी के ‘N’ टाइप सरकारी आवास का बगीचा रोजाना शाम को सभी खिलाड़ियों के लिए चाय की चुस्कियों और खेल चर्चा का मुख्य केंद्र होता था।
- विविधता में एकता: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से आए एथलीट यहाँ बिना किसी अहंकार के एक परिवार की तरह रहते थे।
स्थानीय लोगों और खिलाड़ियों का अटूट रिश्ता
टेल्को टाउनशिप में रहने वाले एथलीटों का व्यवहार इतना सादगीपूर्ण था कि स्थानीय निवासी भी उनसे बहुत करीब से जुड़े हुए थे। खड़ंगाझार स्थित ढाबा मालिकों से लेकर स्थानीय डाकिया तक, सभी खिलाड़ियों को अपार सम्मान और प्रेम देते थे। दिल्ली व अन्य राज्यों से जमशेदपुर पहुंचे युवा खिलाड़ियों के लिए यह नया शहर पूरी तरह से अपना बन गया था।
जमशेदपुर का यह ऐतिहासिक खेल दौर इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति और खेल भावना हो, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती। टेल्को टाउनशिप की यह महान खेल विरासत आज भी झारखंड और देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का एक विशाल स्रोत है।



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