Tariff War: 12 जनवरी, 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा व्यापारिक फैसला लिया। उन्होंने घोषणा की कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उसे अमेरिका के साथ होने वाले अपने सभी व्यापार पर 25% अतिरिक्त टैरिफ (सीमा शुल्क) देना होगा।
1) आदेश और तात्कालिक प्रभाव
- राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा की कि ईरान के साथ व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यापार पर 25% अतिरिक्त टैरिफ देगा।
- यह आदेश “अंतिम और निर्णायक” बताया गया है।
- यह फैसला तत्काल प्रभावी (effective immediately) हो गया है।
2) भारत पर प्रभाव
भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि वह ईरान के शीर्ष पांच व्यापारिक भागीदारों में शामिल है।
- भारतीय निर्यात पर पहले से 50% अमेरिकी टैरिफ बताया गया है।
- इसमें 25% ‘पारस्परिक टैरिफ’ और 25% रूसी तेल खरीदने के कारण दंडात्मक शुल्क शामिल है।
- इस नए 25% शुल्क के जुड़ने से भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ 75% तक पहुँच सकता है।
- इससे बासमती चावल, दवाएं और चाय जैसे निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
3) ईरान में मानवीय संकट
यह व्यापारिक प्रतिबंध ईरान में चल रहे बड़े सरकार विरोधी प्रदर्शनों और वहां की सरकार द्वारा किए जा रहे दमन के बीच लगाया गया है।
- मानवाधिकार संगठनों के अनुसार अब तक कम से कम 648 लोग मारे जा चुके हैं।
- 10,600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
- ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि हिंसा जारी रही, तो वे सैन्य विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं।
4) चीन और वैश्विक व्यापार पर संकट
- चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और उसके तेल निर्यात का 80% हिस्सा खरीदता है।
- इस फैसले से अमेरिका और चीन के बीच अक्टूबर 2025 में हुए हालिया व्यापार समझौते के टूटने का खतरा पैदा हो गया है।
- इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी बाधा आ सकती है।
5) सामरिक हित (चाबहार पोर्ट)
- भारत के लिए ईरान में स्थित चाबहार बंदरगाह सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह भारत को पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच प्रदान करता है।
- नए टैरिफ नियमों के तहत इस बंदरगाह के संचालन से जुड़ी संस्थाओं पर अमेरिकी प्रतिबंधों का खतरा बढ़ सकता है।
6) कानूनी चुनौती और सुप्रीम कोर्ट
- इस व्यापक टैरिफ की वैधता वर्तमान में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के अधीन है, जिस पर 14 जनवरी, 2026 को फैसला आने की संभावना है
- कोर्ट यह तय करेगा कि क्या राष्ट्रपति के पास बिना कांग्रेस की मंजूरी के आपातकालीन शक्तियों (IEEPA कानून) के तहत ऐसे शुल्क लगाने का अधिकार है
- यदि फैसला राष्ट्रपति के खिलाफ आता है, तो सरकार को अरबों डॉलर का रिफंड वापस करना पड़ सकता है




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