1. अटका हुआ 1 अरब डॉलर (9,000 करोड़ रुपये) अब होगा वसूल?
भारत के लिए सबसे बड़ी खबर सरकारी तेल कंपनी ONGC Videsh (OVL) को लेकर है। पिछले एक दशक से वेनेजुएला के ‘सैन क्रिस्टोबाल’ प्रोजेक्ट में भारत का लगभग 1 अरब डॉलर (करीब 9,000 करोड़ रुपये) का लाभांश (dividend) अटका हुआ है। मादुरो सरकार पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह पैसा भारत नहीं आ पा रहा था।अब विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि अमेरिका अब वेनेजुएला के तेल प्रबंधन को अपने हाथ में ले रहा है, भारत के इस पुराने बकाये की वसूली का रास्ता साफ हो गया है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) के अनुसार, यह ओएनजीसी के लिए एक बड़ा ‘बैलेंस शीट बूस्ट’ साबित होगा।
2. भारतीय शेयर बाजार: रिलायंस और ओएनजीसी में तेजी
इस खबर का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) पर भी साफ दिखा।रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL): रिलायंस के शेयरों ने 1,611.80 रुपये का नया 52-वीक हाई छुआ। रिलायंस की रिफाइनरियां वेनेजुएला के ‘भारी कच्चे तेल’ (Heavy Crude) को प्रोसेस करने के लिए दुनिया में सबसे आधुनिक मानी जाती हैं।
ONGC: कंपनी के शेयरों में भी करीब 2% की तेजी देखी गई। निवेशकों को उम्मीद है कि अब ओएनजीसी गुजरात से अपनी ड्रिलिंग रिग्स वेनेजुएला भेजकर वहां फिर से उत्पादन शुरू कर पाएगी।
3. रूस से निर्भरता कम करने का मौका
यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत रूस से भारी मात्रा में सस्ता तेल खरीद रहा है, जिससे अमेरिका थोड़ा असहज रहा है। अब अमेरिका वेनेजुएला को रूस के ‘विकल्प’ के रूप में भारत के सामने पेश कर रहा है। यदि भारत वेनेजुएला से तेल की खरीदारी बढ़ाता है, तो इससे उसे दो फायदे होंगे
सस्ता तेल: अमेरिका वेनेजुएला के तेल पर भारत को भारी छूट (Discount) दे सकता है।
बेहतर कूटनीति: रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बनाने में भारत को आसानी होगी।
4. आम जनता पर क्या होगा असर?
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 60-64 डॉलर के बीच स्थिर हैं। चूंकि भारत अभी वेनेजुएला से बहुत कम तेल (सिर्फ 0.3%) आयात कर रहा है, इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन लंबी अवधि में, अगर वेनेजुएला का उत्पादन बढ़ता है, तो वैश्विक तेल कीमतें गिरेंगी, जिससे भारत में महंगाई कम करने में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष: भारत के लिए ‘विन-विन’ स्थिति
वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन या अमेरिकी नियंत्रण भारत के लिए “आर्थिक वरदान” साबित हो सकता है। एक तरफ जहां हमारा पुराना पैसा वापस मिलेगा, वहीं भविष्य के लिए ऊर्जा सुरक्षा भी पुख्ता होगी। हालांकि, विदेश मंत्रालय (MEA) इस मुद्दे पर ‘देखो और इंतजार करो’ (Wait and Watch) की नीति अपना रहा है ताकि रूस और अमेरिका दोनों के साथ रिश्ते बने रहें।




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